यह सुविधा राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन और भारत के नेट जीरो 2030 लक्ष्यों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
कांडला, 31 जुलाई 2025: केंद्रीय बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने आज गुजरात के कांडला में दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी (डीपीए) पर भारत के पहले स्वदेशी 1 मेगावाट ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट का उद्घाटन किया। इसे भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा में एक ऐतिहासिक कदम बताया जा रहा है, जो राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2030 तक सतत समुद्री विकास के दृष्टिकोण के अनुरूप है।
हरित परिवर्तन में एक मील का पत्थर
1 मेगावाट का यह प्लांट, जिसकी नींव 26 मई 2025 को भुज में पीएम मोदी द्वारा रखी गई थी, मात्र चार महीनों में शुरू हो गया। यह 10 मेगावाट के बड़े प्रोजेक्ट का हिस्सा है। यह प्लांट सालाना लगभग 140 मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करेगा, जो बंदरगाह के संचालन, जैसे 11 बसों और स्ट्रीट लाइटिंग को शक्ति देगा। भविष्य में इसे टग्स और जहाजों के लिए ईंधन के रूप में उपयोग करने की योजना है। लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) द्वारा इंजीनियर्ड और पूरी तरह से भारतीय इंजीनियरों द्वारा निर्मित यह प्लांट ‘मेक इन इंडिया’ पहल का प्रतीक है और ग्रीन हाइड्रोजन इकोसिस्टम में आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।
सोनोवाल ने इस परियोजना को “मेरीटाइम इंडिया विजन 2030 के तहत गति, पैमाने और कौशल का शानदार उदाहरण” बताया। उद्घाटन समारोह में केंद्रीय राज्य मंत्री शांतनु ठाकुर, सचिव टी.के. रामचंद्रन और डीपीए के अध्यक्ष सुशील कुमार सिंह मौजूद थे। सोनोवाल ने कहा, “यह मील का पत्थर पीएम मोदी के नेतृत्व का प्रमाण है, जो भारत को स्वच्छ, हरित और आत्मनिर्भर भविष्य की ओर ले जा रहा है।”
रणनीतिक संदर्भ और प्रभाव
इस प्लांट का शुरू होना राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसका लक्ष्य भारत को ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन में वैश्विक नेता बनाना है। नौवहन और भारी उद्योग जैसे क्षेत्रों को डीकार्बनाइज करने में ग्रीन हाइड्रोजन की महत्वपूर्ण भूमिका है, और कांडला की यह सुविधा अन्य भारतीय बंदरगाहों के लिए एक मिसाल कायम करती है। डीपीए द्वारा पहले देश का पहला ऑल-इलेक्ट्रिक ग्रीन टग शुरू करने से इसकी सतत संचालन के प्रति प्रतिबद्धता और मजबूत होती है।
मात्र चार महीनों में 1 मेगावाट मॉड्यूल को पूरा करना भारत की नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में बढ़ती विशेषज्ञता को दर्शाता है। 2025-26 के अंत तक 5 मेगावाट और 2026-27 के मध्य तक पूर्ण 10 मेगावाट सुविधा शुरू करने की योजना है। यह विस्तार बंदरगाह की पर्यावरण-अनुकूल संचालन को समर्थन देगा, जो भारत के 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन लक्ष्य के अनुरूप है।
नेताओं की प्रतिक्रिया
सोनोवाल ने एलएंडटी की इंजीनियरिंग सटीकता और डीपीए के सक्रिय दृष्टिकोण की सराहना की। उन्होंने कहा, “यह प्लांट भारत के सभी बंदरगाहों के लिए नवोन्मेषी और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को अपनाने की प्रेरणा है।” शांतनु ठाकुर ने इसे “सतत समुद्री भविष्य की दिशा में एक साहसिक कदम” बताया।
भविष्य की राह
कांडला प्लांट की सफलता से देश के अन्य बंदरगाहों में ग्रीन हाइड्रोजन अपनाने का रास्ता खुलेगा, जिसमें विमानन और भारी उद्योग जैसे क्षेत्रों में भी इसका उपयोग हो सकता है। मेरीटाइम इंडिया विजन 2030 के तहत, डीपीए अपनी क्षमता और सतत पहलों को बढ़ाने के लिए 57,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगा। 10 मेगावाट प्रोजेक्ट का अगला चरण दीनदयाल पोर्ट को भारत की स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में अग्रणी बनाएगा।