शेयर बाजार में निवेश और ट्रेडिंग शुरू करने वालों के लिए यहां कुछ महत्वपूर्ण शब्दों और उनके अर्थों की जानकारी दी गई है।
प्रमुख शेयर बाजार शब्दावली
1. बुल मार्केट (तेजड़िया बाजार)
जब शेयर की कीमतें लगातार बढ़ रही हों और निवेशक आशावादी हों, तो इसे बुल मार्केट कहते हैं। अगर आपको लगता है कि कोई शेयर ऊपर जाएगा, तो आप उस पर बुलिश हैं।
उदाहरण: 2020 के मध्य से 2022 की शुरुआत तक भारतीय शेयर बाजार तेजड़िया था।
2. बेयर मार्केट (मंदड़िया बाजार)
जब शेयर कीमतें लगातार गिर रही हों और निवेशक निराशावादी हों, तो इसे बेयर मार्केट कहते हैं। अगर आपको लगता है कि कोई शेयर नीचे जाएगा, तो आप उस पर बेयरिश हैं।
उदाहरण: 2008 के वित्तीय संकट के दौरान बाजार मंदड़िया था।
3. ट्रेंड (बाजार की दिशा)
बाजार का ट्रेंड तीन तरह का हो सकता है:
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ऊपर की ओर (बुलिश) – कीमतें बढ़ रही हैं।
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नीचे की ओर (बेयरिश) – कीमतें गिर रही हैं।
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साइडवेज (रेंजबाउंड) – कीमतें एक सीमा में घूम रही हैं।
4. फेस वैल्यू (अंकित मूल्य)
शेयर का फेस वैल्यू (FV) वह मूल्य है जो कंपनी ने उसे जारी करते समय तय किया था। यह डिविडेंड, स्टॉक स्प्लिट और बोनस जैसी कॉर्पोरेट एक्शन के लिए महत्वपूर्ण है।
उदाहरण: अगर इंफोसिस (FV ₹5) ₹63 का डिविडेंड देता है, तो डिविडेंड यील्ड 1260% (63 ÷ 5) होगा।
5. 52-वीक हाई/लो
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52-वीक हाई – पिछले एक साल में शेयर की सबसे ऊंची कीमत।
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52-वीक लो – पिछले एक साल में शेयर की सबसे निचली कीमत।
अगर कोई शेयर अपने 52-वीक हाई के पास है, तो इसे बुलिश माना जाता है।
6. ऑल-टाइम हाई/लो
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ऑल-टाइम हाई (ATH) – शेयर की अब तक की सबसे ऊंची कीमत।
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ऑल-टाइम लो (ATL) – शेयर की अब तक की सबसे निचली कीमत।
7. अपर और लोअर सर्किट
बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव रोकने के लिए सर्किट लिमिट लगाई जाती है:
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अपर सर्किट – शेयर की अधिकतम बढ़ने की सीमा (जैसे 5%, 10%, 20%)।
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लोअर सर्किट – शेयर की अधिकतम गिरने की सीमा।
अगर शेयर सर्किट लगाता है, तो कुछ देर के लिए ट्रेडिंग रोक दी जाती है।
8. लॉन्ग पोजीशन (खरीदना)
जब आप किसी शेयर को खरीदते हैं और उसके ऊपर जाने की उम्मीद करते हैं, तो आप लॉन्ग हैं।
उदाहरण: रिलायंस के शेयर ₹2,500 पर खरीदकर उनके ऊपर जाने का इंतजार करना।
9. शॉर्ट पोजीशन (शॉर्ट सेलिंग)
शॉर्ट सेलिंग का मतलब है कि आप उस शेयर को बेच देते हैं जो आपके पास नहीं है, और बाद में सस्ते में वापस खरीदने की उम्मीद करते हैं।
उदाहरण:
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विप्रो को ₹425 पर बेचें (गिरने की उम्मीद में)।
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₹405 पर वापस खरीदकर ₹20 का मुनाफा कमाएं।
नोट: कैश मार्केट में शॉर्ट सेलिंग को उसी दिन बंद करना होता है।
10. स्क्वायर ऑफ (पोजीशन बंद करना)
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लॉन्ग पोजीशन → शेयर बेचकर बंद करें।
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शॉर्ट पोजीशन → शेयर वापस खरीदकर बंद करें।
11. इंट्राडे ट्रेडिंग
शेयर को एक ही दिन में खरीदकर बेचना ताकि छोटे मूवमेंट से मुनाफा कमाया जा सके।
12. OHLC (ओपन, हाई, लो, क्लोज)
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ओपन – दिन का पहला भाव।
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हाई – दिन की सबसे ऊंची कीमत।
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लो – दिन की सबसे निचली कीमत।
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क्लोज – दिन का आखिरी भाव।
उदाहरण: अगर ACC का OHLC ₹1486, ₹1511, ₹1467, ₹1499 है, तो इससे दिनभर की कीमतों का पता चलता है।
13. वॉल्यूम (ट्रेडिंग की मात्रा)
एक दिन में किसी शेयर के कुल कारोबार को वॉल्यूम कहते हैं। ज्यादा वॉल्यूम का मतलब है कि शेयर में दिलचस्पी ज्यादा है।
उदाहरण: अगर ACC का वॉल्यूम 5,33,819 शेयर है, तो इसका मतलब है कि उस दिन इतने शेयर खरीदे-बेचे गए।
14. मार्केट सेगमेंट (बाजार के विभाग)
शेयर बाजार के अलग-अलग हिस्से होते हैं:
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कैपिटल मार्केट (CM) – शेयर और ETF की ट्रेडिंग।
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फ्यूचर्स और ऑप्शन (F&O) – डेरिवेटिव ट्रेडिंग।
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करेंसी डेरिवेटिव्स (CDS) – USD/INR जैसी करेंसी जोड़े की ट्रेडिंग।
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व्होलसेल डेट मार्केट (WDM) – बॉन्ड और डेट सिक्योरिटीज की ट्रेडिंग।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. क्या शॉर्ट सेलिंग रातभर रखी जा सकती है?
नहीं, कैश मार्केट में शॉर्ट सेलिंग को उसी दिन बंद करना होता है। लेकिन F&O सेगमेंट में इसे लंबे समय तक रखा जा सकता है।
Q2. अगर कोई शेयर अपर सर्किट लगा ले तो क्या होता है?
ट्रेडिंग रुक जाती है, और सिर्फ खरीदारी के आर्डर लग सकते हैं।
Q3. फेस वैल्यू और मार्केट प्राइस में क्या अंतर है?
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फेस वैल्यू (FV) – शेयर जारी करते समय तय मूल्य (जैसे ₹10)।
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मार्केट प्राइस – शेयर की वर्तमान कीमत (जैसे ₹1,500)।
Q4. क्या शुरुआती लोग इंट्राडे ट्रेडिंग से मुनाफा कमा सकते हैं?
इंट्राडे ट्रेडिंग जोखिम भरी होती है। शुरुआत में लॉन्ग-टर्म निवेश बेहतर है।
Q5. अगर इंट्राडे शॉर्ट सेलिंग बंद नहीं की तो क्या होगा?
ब्रोकर शेयर को ऑक्शन में बेच सकता है, और आप पर जुर्माना लग सकता है |