भारतीय परिवार बढ़ते कर्ज़ में, संपत्ति की रफ्तार धीमी: RBI का बड़ा संकेत (2019-2025)

भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी सामने आई है। भारतीय परिवार पहले से कहीं ज़्यादा तेज़ी से कर्ज़ ले रहे हैं, लेकिन उसी गति से संपत्ति (assets) नहीं बना रहे। आरबीआई के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक 2019 से 2025 के बीच घरेलू वित्तीय देनदारियाँ (liabilities) 102% बढ़ीं, जबकि वित्तीय संपत्तियाँ सिर्फ 48% बढ़ीं।

यानी कमाई और बचत की रफ्तार धीमी, पर EMI पर चलने वाली ज़िंदगी तेज़।

अगर आप “India Household Debt 2025” या “RBI Financial Assets vs Liabilities” जैसे विषय ट्रैक कर रहे हैं, तो यह रिपोर्ट समझना ज़रूरी है — खासकर भारत के मिडिल क्लास के लिए।

📉 आंकड़े बताते हैं – आम घरों की बैलेंस शीट बिगड़ रही है

कभी भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूती घरेलू बचत दर मानी जाती थी, लेकिन कोविड के बाद तस्वीर बदल गई।

2019-2025 के मुख्य ट्रेंड:

  • ✅ वित्तीय संपत्तियाँ (बचत, निवेश आदि) – 48% बढ़ीं
  • ❌ वित्तीय देनदारियाँ (लोन, क्रेडिट, EMI) – 102% बढ़ीं
  • ❗ सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के अनुपात में:
    • एसेट जोड़ना 12% से घटकर 10.8% पर अटका
    • लायबिलिटी हिस्सा लगातार ऊपर जा रहा

घरेलू कर्ज़-से-GDP अनुपात 2019 के 30% से बढ़कर करीब 40% हो चुका है।

📌 क्यों बढ़ा घरेलू कर्ज़?

  1. सस्ता और आसान क्रेडिट
    • डिजिटल लोन ऐप्स, क्रेडिट कार्ड, BNPL कल्चर
    • पर्सनल लोन में 25% सालाना उछाल
  2. महंगाई और वेतन ठहराव
    • शहरी वेतन वृद्धि 7%, महंगाई 10%
    • यानी बचत कम, उधार ज़्यादा
  3. रियल एस्टेट और गोल्ड बूम
    • “निवेश” के नाम पर घर, प्लॉट, सोना खरीदने के लिए लोन
  4. ग्रामीण-शहरी कर्ज़ का फर्क
    • शहर: कार, मोबाइल, यात्रा, गैजेट EMI
    • गाँव: माइक्रोफाइनेंस, कृषि इनपुट लोन

📈 निवेश का नया ट्रेंड: म्यूचुअल फंड्स

बुरी खबरों के बीच एक सकारात्मक बदलाव भी दिखा।

  • SIP इनफ्लो FY25 में पहुँचा: ₹2.3 लाख करोड़ (40% सालाना वृद्धि)
  • 10 करोड़ से अधिक यूनिक MF निवेशक
  • FD 6-7% रिटर्न दे रहा, इक्विटी फंड 15%+

यानी जो लोग बचत कर रहे हैं, वे अब सोने या नकद के बजाय मार्केट में निवेश कर रहे हैं — लेकिन ये निवेश दर अभी भी कर्ज़ की रफ्तार से कम है।

📊 2019-2025: एसेट बनाम लायबिलिटी (RBI डेटा)

वर्षजोड़ी गई वित्तीय संपत्ति (₹ लाख करोड़)जोड़ा गया कर्ज़ (₹ लाख करोड़)GDP का % (एसेट)GDP का % (कर्ज़)
FY2018.08.512.0%5.7%
FY2116.510.211.2%6.9%
FY2219.212.810.9%7.3%
FY2322.115.410.8%8.1%
FY2424.518.710.8%9.2%
FY25*26.617.210.8%9.5%

*FY25 अनुमानित

🔍 ग्राफ़ में देखें तो कर्ज़ की लाइन तेज़ चढ़ रही है, बचत की धीरे-धीरे।

⚠️ इसमें खतरा क्या है?

क्षेत्रअसर
🔻 खपत (Consumption)EMI बढ़ने से वैकल्पिक खर्च घट सकता है
🏦 बैंकिंगरिटेल लोन 35% तक, NPA जोखिम बढ़ सकता
⚖️ असमानताटॉप 20% लोन लेकर एसेट बना रहे, नीचे के 40% लोन लेकर ज़रूरतें पूरी
🏛️ नीति दबावRBI ब्याज दर बढ़ा सकता, सरकार पर आय बढ़ाने का दबाव

✅ क्या किया जा सकता है?

घरेलू स्तर पर:

  • 6 महीने का इमरजेंसी फंड रखें
  • हाई-इंटरेस्ट लोन रीफाइनेंस करें
  • गोल्ड/FD से बेहतर SIP/ETF चुनें
  • Debt-to-Income Ratio 35% से ऊपर न जाने दें

नीति स्तर पर:

  • प्रेडेटरी लेंडिंग पर नियंत्रण
  • डिजिटल लोन ऐप्स की कड़ी निगरानी
  • आय बढ़ाने वाली स्किल/जॉब स्कीम्स
  • क्रेडिट-एजुकेशन अनिवार्य करना

🔍 क्या भारत 2026 में कर्ज़ के बोझ के साथ बढ़ेगा?

GDP ग्रोथ 6.5-7% रहने का अनुमान है — लेकिन यदि household debt control नहीं हुआ, तो 0.5% तक गिरावट आ सकती है।

भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की राह पर है — पर रास्ते में एक सवाल है:

“हम कर्ज़ से तरक़्क़ी करेंगे, या बचत से?”

📣 आपका अनुभव क्या कहता है?

क्या आपने भी EMI पर ज़िंदगी चलाना शुरू कर दिया है?
या फिर SIP से वित्तीय आज़ादी की तरफ बढ़ रहे हैं?

कमेन्ट में बताइए — आपकी कहानी किसी और की सीख बन सकती है।

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