भारत में निजी क्षेत्र की वृद्धि 5 माह के निचले स्तर पर — अक्टूबर 2025 में PMI ने दिखाया धीमा पड़ाव

अक्टूबर 2025 में भारत की निजी क्षेत्र की गतिविधियाँ मंद होती नजर आईं। HSBC फ्लैश भारत कंपोजिट PMI, जिसे S&P Global द्वारा तैयार किया गया है, सितंबर में 61.0 से गिरकर 59.9 पर आ गया — जबकि अर्थशास्त्रियों की उम्मीद थी कि यह 61.2 तक रहेगी। वृद्धि अभी भी तेजी में है (50 से ऊपर) लेकिन यह संकेत देती है कि गति धीमी पड़ रही है। Reuters

क्या कारण हैं? नीचे देखें प्रमुख कारक

  1. घटती घरेलू-वैश्विक माँग
    नए ऑर्डर्स का विस्तार मई के बाद सबसे धीमा रहा है। घरेलू उपभोक्ता खर्च सुस्त हुआ है, साथ ही निर्यात के लिए माँग भी कमजोर पड़ी है। Reuters
  2. उत्पादन और विक्रय मूल्य वृद्धि
    जीएसटी कटौती के बावजूद कंपनियों ने उत्पादन लागत बढ़ने के कारण अपने विक्रय मूल्य बढ़ाए। इससे ग्राहक की क्रय-शक्ति पर असर पड़ा। Reuters
  3. सेवाओं में अधिक गिरावट
    जबकि विनिर्माण सेक्टर ने थोड़ा बेहतर प्रदर्शन किया, सेवाओं (जिसमें भारत का बड़ा हिस्सा है) में मोमेंटम कमजोर हुआ है। Reuters
  4. यू.एस. द्वारा बढ़ते टैरिफ-खतरे
    अमेरिका ने भारत-के निर्यात पर टैरिफ बढ़ाने की चेतावनी दी है, खासकर भारत-रूस के तेल आयात को लेकर। इस जानकाऱी से निर्यातओं में अनिश्चितता बनी हुई है। Reuters

सेक्टर वाइज क्या नजर आया?

सेक्टरअक्टूबर PMIसितंबर PMIमुख्य बिंदु
समग्र (Composite)59.961.0पाँच माह का न्यूनतम
विनिर्माण58.457.7हल्की सुधर, नए ऑर्डर्स में बढ़त
सेवाएँ58.860.9तेजी से धीमी, घरेलू–निर्यात दोनों में दबाव

विनिर्माण सेक्टर ने नए ऑर्डर्स में बढ़त दिखाई और उत्पादन बढ़ा। इसके बावजूद निर्यात में दबाव रहा।
सेवाएँ सेक्टर — जो भारत की अर्थव्यवस्था का बड़ी हिस्सेदार है — में धीमी गति ने चिंता बढाई।

भारत-यू.एस. व्यापार तनाव : एक बड़ा लेंस

अक्टूबर के PMI डेटा में यह भी छिपा हुआ असर दिखा कि यू.एस. टैरिफ खतरा भारत-के निजी क्षेत्र पर असर डाल रहा है। अमेरिका ने आग्रह किया है कि भारत को रूस से तेल आयात कम करना चाहिए—यदि ऐसा नहीं हुआ, तो भारतीय निर्यात पर टैरिफ बढ़ाया जा सकता है। यह चेतावनी कंपनियों के मनोदशा को प्रभावित कर रही है। Reuters

निर्यात-मांग में कमी, विशेषकर अमेरिका के लिए, PMI सर्वे में उजागर हुई। यह संकेत देता है कि भारत को उभरते बाज़ारों और वैकल्पिक निर्यात गंतव्यों की ओर तेजी से रुख करना होगा।

आगे क्या देखने योग्य है?

  • यदि यह 59.9 स्तर से आगे भी लगातार नीचे जाता रहा, तो FY26 की GDP वृद्धि अनुमान 6.8% से 6.5% के करीब जा सकती है।
  • Reserve Bank of India (RBI) को अब यह तय करना होगा कि क्या दरें कम करे या स्थिर रखे, क्योंकि मुद्रास्फीति नियंत्रण बनाम वृद्धि को संतुलित करना चुनौती बन गया है।
  • निवेशकों के लिए संकेत मिलते हैं: सेवा-क्षेत्र मेंजल्दी सुधार नहीं दिख रहा है, इसलिए डिजिटल सेवाएँ, हरित उत्पादन, और मैन्युफैक्चरिंग एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड कंपनियाँ बेहतर विकल्प हो सकती हैं।

निष्कर्ष

भारत का निजी क्षेत्र अभी भी विकास की पगडंडी पर है, लेकिन अक्टूबर 2025 के आंकड़ों ने यह स्पष्ट किया है कि गति धीमी पड़ रही है। घरेलू मांग सुस्त, सेवा क्षेत्र कमजोर और निर्यात-दबाव बढ़ा हुआ है। इस सब के बीच, अमेरिकी टैरिफ-खतरे ने वैश्विक व्यापार निर्भरता को और उजागर कर दिया है। भारत के लिए अब जरूरत है कि वह निर्यात विविधीकरण, घरेलू उपभोग को पुनर्जीवित करना, और सेवा क्षेत्र में सुधार को प्राथमिकता दे।

यदि आप यह जानना चाहें कि अगले महीने का PMI क्या संकेत देगा या कौन-से सेक्टर इस बदलाव से सबसे अधिक लाभ उठा सकते हैं, तो मुझे बताइए — मैं उस पर भी ब्लॉग तैयार कर सकता हूँ।

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