भारत ने अमेरिका से बढ़ाएंगे तेल आयात, $15 अरब तक बढ़ सकता है सालाना व्यापार

15 अक्टूबर, 2025 – वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने घोषणा की है कि भारत अमेरिका से ऊर्जा आयात में सालाना 14-15 अरब डॉलर तक की वृद्धि कर सकता है। यह कदम अमेरिकी टैरिफ के दबाव के बीच उठाया जा रहा है और भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का हिस्सा है।

व्यापार वार्ता का संदर्भ

यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब भारतीय प्रतिनिधिमंडल अमेरिका में व्यापार वार्ता के लिए मौजूद है। अमेरिका ने भारतीय सामानों पर 50% का आयात शुल्क लगाया है, जिसका जवाब देने के लिए भारत यह रणनीतिक कदम उठा रहा है।

ऊर्जा आयात की वर्तमान स्थिति

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और उसकी 85% से अधिक जरूरतें आयात से पूरी होती हैं:

  • अमेरिका से वार्षिक आयात: 12-13 अरब डॉलर
  • अधिकतम आयात: 23-24 अरब डॉलर (हाल के वर्षों में)
  • रूस से आयात: कुल आयात का 30%

विविधीकरण की जरूरत

विशेषज्ञों के अनुसार ऊर्जा आयात के स्रोतों में विविधता लाना भारत के लिए जरूरी है:

  • भू-राजनीतिक जोखिमों में कमी
  • कीमतों में स्थिरता
  • आपूर्ति की निरंतरता सुनिश्चित करना
  • अमेरिका के साथ व्यापार घाटा कम करना

अमेरिका के साथ व्यापार संतुलन

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संतुलन अमेरिका के पक्ष में है:

  • भारत का अमेरिका को निर्यात: 86.51 अरब डॉलर (2024-25)
  • व्यापार घाटा: 41 अरब डॉलर
  • टैरिफ का प्रभाव: टेक्सटाइल और रत्न उद्योग सबसे अधिक प्रभावित

तकनीकी संभावनाएं

भारतीय रिफाइनरियां अमेरिकी कच्चे तेल को आसानी से प्रोसेस कर सकती हैं:

  • रिफाइनरी कॉन्फिगरेशन अनुकूल
  • बड़े पैमाने पर अपग्रेड की जरूरत नहीं
  • एलएनजी आयात की भी संभावना

भविष्य की योजनाएं

वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार:

  • द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर चर्चा जारी
  • नवंबर 2025 तक समझौते की उम्मीद
  • ऊर्जा आयात व्यापार घाटे को संतुलित करने में मददगार

आर्थिक प्रभाव

इस कदम के सकारात्मक प्रभाव होंगे:

  • रुपये पर दबाव में कमी
  • ऊर्जा सुरक्षा में सुधार
  • अमेरिका के साथ संबंधों में मजबूती
  • निवेशकों के विश्वास में वृद्धि

यह रणनीतिक कदम भारत की बदलती भू-राजनीतिक जरूरतों और आर्थिक हितों के अनुरूप है। ऊर्जा आयात में विविधता लाने से भारत को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच उसकी स्थिति मजबूत होगी।

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