सुप्रीम कोर्ट ने विजय रैली हादसे की जांच पर उठाए सवाल, कहा- ‘अनौचित्यपूर्ण है आदेश’

10 अक्टूबर, 2025 – सुप्रीम कोर्ट ने अभिनेता-राजनीतिज्ञ विजय की करूर रैली में हुए भगदड़ मामले की जांच को लेकर मद्रास हाई कोर्ट के आदेश पर सवाल उठाए हैं। 41 लोगों की मौत के इस दुखद घटना की जांच प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता व्यक्त की।

मामले की पृष्ठभूमि

27 सितंबर, 2025 को तमिलनाडु के करूर में विजय की तमिलागा वेत्तरी कझगम (TVK) पार्टी के लॉन्च रैली के दौरान भगदड़ मच गई, जिसमें 41 लोगों की मौत हो गई। अधिकांश पीड़ित महिलाएं और बच्चे थे।

न्यायिक विकास

सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने मद्रास हाई कोर्ट के सिंगल जज द्वारा विशेष जांच दल (SIT) गठन के आदेश को ‘अनौचित्यपूर्ण’ बताया। न्यायमूर्ति जे के महेश्वरी और एन वी अंजरिया की पीठ ने कहा कि जब मदुरै की डिवीजन बेंच पहले ही मामले की सुनवाई कर रही है, तो सिंगल जज द्वारा समानांतर आदेश देना उचित नहीं है।

मुख्य चिंताएं

सुप्रीम कोर्ट ने निम्नलिखित बिंदुओं पर चिंता व्यक्त की:

  • 41 पोस्टमार्टम महज 4-5 घंटे में पूरे करना संदेहास्पद
  • दो अलग-अलग न्यायिक फोरम द्वारा समानांतर कार्यवाही
  • राजनीतिक रैलियों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का अभाव

राजनीतिक प्रतिक्रिया

विजय की पार्टी TVK ने राज्य सरकार द्वारा की जा रही जांच पर सवाल उठाते हुए CBI जांच की मांग की है। उनका तर्क है कि राज्य सरकार द्वारा की जा रही जांच निष्पक्ष नहीं होगी।

सुरक्षा व्यवस्था में कमियां

प्रारंभिक जांच में सामने आई मुख्य कमियां:

  • भीड़ प्रबंधन की अपर्याप्त व्यवस्था
  • पर्याप्त सुरक्षा बलों की तैनाती का अभाव
  • आपातकालीन निकासी की उचित व्यवस्था न होना
  • भीड़ का आकलन ठीक से न कर पाना

अगले कदम

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय की है और सभी पक्षों को अपने-अपने तर्क रखने का अवसर दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार से पोस्टमार्टम की जल्दबाजी पर स्पष्टीकरण भी मांगा है।

राजनीतिक प्रभाव

विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना 2026 के विधानसभा चुनावों को प्रभावित कर सकती है। विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री एम के स्टालिन की सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया है।

यह मामला भारत में बड़े राजनीतिक आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है। सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए बेहतर दिशा-निर्देश बनाने में मददगार साबित हो सकता है।

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