रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर: एच-1बी फी बढ़ोतरी और फंड आउटफ्लो के दबाव में 88.75 के स्तर पर पहुंचा

23 सितंबर, 2025 – भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले शुक्रवार को ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया। रुपया 88.75 के स्तर पर कारोबार करते हुए एक ही दिन में 47 पैसे की गिरावट दर्ज की, जो कई महीनों में सबसे तेज दैनिक गिरावट है।

प्रमुख कारण

विशेषज्ञों के अनुसार रुपया के कमजोर होने के प्रमुख कारण हैं:

  • अमेरिकी एच-1बी वीजा शुल्क में संभावित वृद्धि
  • विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का लगातार पूंजी निकासी
  • वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचाव की प्रवृत्ति
  • आईटी क्षेत्र पर नकारात्मक प्रभाव की आशंका

आईटी क्षेत्र पर प्रभाव

भारत के 250 अरब डॉलर के आईटी सेवा उद्योग के लिए यह चिंता का विषय है, क्योंकि:

  • अमेरिका से 60% राजस्व प्राप्त होता है
  • प्रस्तावित 100,000 डॉलर का वीजा शुल्क लागू होने पर लागत बढ़ेगी
  • एच-1बी वीजा अनुमोदन में 30% तक की कमी की आशंका
  • टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और इंफोसिस जैसी कंपनियां प्रभावित

विदेशी निवेशकों की भूमिका

22 सितंबर को FII ने 2,910 करोड़ रुपये की शेयर बिकवाली की, जबकि अगस्त माह में कुल 46,903 करोड़ रुपये की निकासी दर्ज की गई थी। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 28,645 करोड़ रुपये की खरीदारी कर संतुलन बनाने का प्रयास किया।

तकनीकी विश्लेषण

रुपया ने 88.41 के स्तर पर खोलने के बाद दिन के दौरान 88.82 का निचला स्तर छुआ। विश्लेषकों का मानना है कि अगले कारोबारी सत्र में रुपया 88.45 से 89.20 के बीच Oscillate कर सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक के 89.00 के स्तर पर हस्तक्षेप की संभावना है।

व्यापक आर्थिक प्रभाव

रुपया के कमजोर होने के कुछ सकारात्मक और नकारात्मक पहलू हैं:

सकारात्मक:

  • निर्यातकों को Competitive Advantage
  • आईटी कंपनियों को रुपया आय में वृद्धि

नकारात्मक:

  • आयात महंगा होना
  • मुद्रास्फीति पर दबाव
  • विदेशी यात्रा लागत में वृद्धि

सरकारी कार्रवाई

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की अगुवाई में एक व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल न्यूयॉर्क में वार्ता कर रहा है। नवंबर तक संभावित व्यापार समझौते से स्थिरता आ सकती है। वित्त मंत्रालय और आरबीआई संयुक्त रूप से बाजार स्थिरता सुनिश्चित करने के उपायों पर काम कर रहे हैं।

भविष्य की संभावनाएं

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि रुपया की कमजोरी अल्पकालिक हो सकती है, क्योंकि:

  • भारत के विदेशी मुद्रा भंडार 690.72 अरब डॉलर पर मजबूत
  • मौलिक आर्थिक संकेतक स्थिर
  • दीर्घकालिक विकास संभावनाएं मजबूत

निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे इस अस्थिरता के दौरान संयम बनाए रखें और दीर्घकालिक निवेश रणनीति पर ध्यान केंद्रित करें।

यह विकास वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और व्यापारिक तनावों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की लचीलापन की परीक्षा का प्रतिनिधित्व करता है।

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