22 सितंबर, 2025 – अमेरिका पर भारत के निर्यात में चौंकाने वाली गिरावट दर्ज की गई है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के अनुसार, मई से अगस्त 2025 के बीच भारत के अमेरिकी निर्यात में 22.2% की कमी आई है, जो 8.83 अरब डॉलर से घटकर 6.87 अरब डॉलर रह गया है।
टैरिफ संरचना और निर्यात प्रभाव
रिपोर्ट में तीन श्रेणियों में निर्यात प्रवृत्तियों का विश्लेषण किया गया:
- टैरिफ-मुक्त उत्पाद: स्मार्टफोन, दवाएं और पेट्रोलियम उत्पाद
- 41.93% की भारी गिरावट (3.37 अरब डॉलर से 1.96 अरब डॉलर)
- स्मार्टफोन निर्यात में 58% की कमी
- एकसमान टैरिफ वाले उत्पाद: लोहा, इस्पात, एल्युमिनियम
- मामूली 4.04% गिरावट
- परिवर्तनशील टैरिफ वाले उत्पाद: कपड़ा, रत्न, आभूषण
- 10.80% की गिरावट
विशेषज्ञों की राय
GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने इस गिरावट को “चिंताजनक और अंतर्ज्ञान के विपरीत” बताया है। उन्होंने कहा कि टैरिफ-मुक्त उत्पादों में इतनी भारी गिरावट के अंतर्निहित कारणों की तत्काल जांच की आवश्यकता है।
संभावित कारण
विश्लेषकों के अनुसार गिरावट के प्रमुख कारण हो सकते हैं:
- अमेरिकी आयातकों द्वारा टैरिफ से पहले स्टॉक जमा करना
- वैश्विक आर्थिक मंदी का प्रभाव
- आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान
- निवेशकों में अनिश्चितता
आर्थिक प्रभाव
अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है, जो 2024-25 में कुल निर्यात का 20% हिस्सा था। इस गिरावट का भारतीय अर्थव्यवस्था पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है, खासकर रोजगार और औद्योगिक उत्पादन पर।
सरकारी कार्रवाई
सरकार निर्यात को बढ़ावा देने के लिए 2,250 करोड़ रुपये के निर्यात प्रोत्साहन मिशन शुरू करने पर विचार कर रही है। वाणिज्य मंत्रालय निर्यातकों की चुनौतियों को दूर करने के लिए उपायों पर काम कर रहा है।
भविष्य की संभावनाएं
विशेषज्ञों का मानना है कि सितंबर के आंकड़े और चिंताजनक हो सकते हैं, क्योंकि यह 50% टैरिफ के पूर्ण प्रभाव वाला पहला महीना होगा। निर्यातकों को बाजार विविधीकरण और गुणवत्ता सुधार पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है।
यह विकास भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ का प्रतिनिधित्व करता है और आने वाले महीनों में व्यापार नीति पर फिर से विचार की आवश्यकता को रेखांकित करता है।