पिछले सप्ताह अमेरिका द्वारा भारतीय सामानों पर अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने के बाद डालाल स्ट्रीट पर भालुओं का दबदबा रहा, जिसने बेंचमार्क सूचकांकों को अगस्त के निचले स्तरों के पास पहुँचा दिया। सेंसेक्स और निफ्टी में लगभग 1.8% की गिरावट दर्ज की गई। FIIs की aggressive selling और रुपये के अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुँचने ने मंदी के रुख को और मजबूत किया। हालाँकि, इस सप्ताह (1 सितंबर से शुरू) बाजार के rangebound रहने का अनुमान है, जिस पर जीएसटी काउंसिल की बैठक, अगस्त माह की ऑटो सेल्स, US की नौकरी संबंधी आंकड़े और वैश्विक PMI डेटा जैसे कारकों का असर रहेगा। आइए, इस सप्ताह के लिए निवेशकों को किन-किन बातों पर नजर रखनी चाहिए, इस पर एक विस्तृत नजर डालते हैं।
1. जीएसटी काउंसिल की महत्वपूर्ण बैठक
3 और 4 सितंबर को होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक इस सप्ताह का सबसे अहम घरेलू ट्रिगर है। US द्वारा लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ का जवाब देने और घरेलू मांग को बढ़ावा देने के लिए इस बैठक में जीएसटी दरों में तर्कसंगत बदलाव पर अंतिम फैसला हो सकता है।
ऐसा अनुमान है कि सरकार जल्द ही दो-स्तरीय जीएसटी व्यवस्था (5% और 18%) लागू कर सकती है, जिसमें कपड़ा, फुटवियर, रसायन, दवाएं, शिक्षा और कृषि जैसे कई सेक्टर शामिल होंगे। दिवाली से पहले इन सुधारों के लागू होने से उपभोक्ता सामान (FMCG), ड्युरेबल्स और इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
डेटा पॉइंट: CNBC-TV18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, US टैरिफ से प्रभावित टेक्सटाइल और फुटवियर सेक्टर पर वर्तमान 12% की बजाय 5% की कम जीएसटी दर लागू हो सकती है, जिससे इनके दाम घटेंगे और मांग बढ़ेगी।
2. अमेरिकी नौकरी बाजार के आंकड़े: फेड की दिशा तय करेंगे
वैश्विक स्तर पर, इस सप्ताह सभी की नजर अमेरिका से आने वाले श्रम बाजार के आंकड़ों पर टिकी होगी। जुलाई के लिए JOLTs जॉब ओपनिंग और क्विट्स डेटा के बाद अगस्त के लिए बेरोजगारी दर और non-farm payrolls की घोषणा सबसे अहम होगी।
फेड रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने हाल ही में श्रम बाजार में जोखिमों की ओर इशारा किया था। ऐसे में, अगस्त की नौकरी रिपोर्ट में कमजोरी सितंबर में ब्याज दरों में कटौती की संभावना को और मजबूत कर सकती है।

3. वैश्विक आर्थिक डेटा: PMI आंकड़ों पर रहेगी नजर
इस सप्ताह दुनिया भर में manufacturing और services sector के PMI (Purchasing Managers’ Index) के final आंकड़े जारी होंगे। अमेरिका, यूरोजोन, जापान और चीन जैसे प्रमुख देशों के आंकड़े वैश्विक आर्थिक स्वास्थ्य की एक स्पष्ट तस्वीर पेश करेंगे।
भारत में भी, HSBC द्वारा जारी किए जाने वाले Manufacturing और Services PMI के final आंकड़े क्रमशः 1 और 3 सितंबर को आएंगे। preliminary estimates के मुताबिक, अगस्त में Manufacturing PMI 59.8 और Services PMI 65.6 पर रहने का अनुमान है, जो जुलाई के मुकाबले बेहतर है।
डेटा पॉइंट: भारत का Services PMI लगातार 33वें महीने expansion zone (50 से ऊपर) में बना हुआ है, जो घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है।
4. अगस्त माह की ऑटो सेल्स: ऑटो स्टॉक्स में होगी हलचल
इस सप्ताह का एक और अहम घरेलू ट्रिगर ऑटोमोबाइल कंपनियों की अगस्त माह की monthly sales figures का आना है। यह डेटा कार, SUV, two-wheeler और commercial vehicle segments की मांग की सेहत बताएगा।
टाटा मोटर्स, महिंद्रा & महिंद्रा, अशोक लेयलैंड, बजाज ऑटो, हीरो मोटोकॉर्प, TVS मोटर और एशर मोटर्स जैसी कंपनियों के स्टॉक इस डेटा के आधार पर volatility दिखा सकते हैं। मानसून बेहतर रहने और त्योहारी सीजन की शुरुआत से सेल्स में सुधार की उम्मीद है।
चार्ट सुझाव:
दृश्य: पिछले 6 महीनों की ऑटो सेल्स की तुलना दिखाता एक बार ग्राफ।
ALT टेक्स्ट: भारत में ऑटोमोबाइल की मासिक बिक्री में रुझान
5. FII बहिर्वाह: कब थमेगा विक्रय?
FIIs (विदेशी संस्थागत निवेशक) पिछले सप्ताह aggressive sellers बने रहे। US टैरिफ और high valuations के चलते उन्होंने सप्ताह में 21,152 करोड़ रुपये के शेयरों की net selling की। अगस्त महीने का कुल बहिर्वाह 46,903 करोड़ रुपये के करीब रहा।
इसके विपरीत, DIIs (घरेलू संस्थागत निवेशक) ने हर dip पर मजबूत buying करके बाजार को सहारा दिया। उन्होंने पिछले सप्ताह 28,645 करोड़ रुपये की net buying की और अगस्त में 94,829 करोड़ रुपये की खरीदारी की, जो अक्टूबर 2024 के बाद से सबसे ज्यादा है।
निवेशकों को इस सप्ताह FIIs के रुख पर नजर रखनी चाहिए। अगर विक्रय जारी रहता है तो बाजार पर दबाव बना रह सकता है।
6. रुपया: क्या जारी रहेगा अब तक के निचले स्तर पर?
रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पिछले सप्ताह 0.66% की गिरावट के साथ 88.12 के अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुँच गया। India-US trade war, importers की hedging demand और FII outflows ने रुपये पर दबाव बनाए रखा।
विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापार युद्ध की चिंताओं के चलते रुपया short term में अभी under pressure ही रहेगा, हालाँकि निर्यातक कंपनियों के लिए यह एक कुशन का काम करेगा।
7. तकनीकी विश्लेषण: निफ्टी के लिए 24,400 है महत्वपूर्ण सपोर्ट
तकनीकी रूप से, निफ्टी 50 weak structure में दिख रहा है। हालाँकि, उसने शुक्रवार को एक upward sloping support trendline पर सपोर्ट लिया है। अगर यह सपोर्ट टूटता है (24,400 के आसपास) तो index अगस्त के निचले स्तर (24,200 के आसपास) तक जा सकता है।
ऊपर की ओर, 24,700 एक तात्कालिक रेजिस्टेंस है और उसके बाद 25,000 एक मजबूत रेजिस्टेंस है। RSI और MACD जैसे indicators भी bearish crossover दिखा रहे हैं, जो selling pressure का संकेत देते हैं।
8. प्राथमिक बाजार (IPO) में रहेगी रौनक
सेकेंडरी मार्केट की नरमी के बावजूद प्राथमिक बाजार (IPO) में इस सप्ताह भी जोर रहेगा। मुख्यबोर्ड से अमांता हेल्थकेयर का 126 करोड़ रुपये का IPO 1 सितंबर से खुलेगा।
इसके अलावा, SME सेगमेंट में सात नए IPO – रचित प्रिंट्स, गोयल कंस्ट्रक्शन, ऑप्टिवैल्यू टेक कंसल्टिंग, ऑस्टेयर सिस्टम्स, विगोर प्लास्ट इंडिया, शर्व्या मेटल्स, और वशिष्ठ लग्जरी फैशन – लॉन्च होंगे। कुल मिलाकर 11 SME IPO की लिस्टिंग भी इसी सप्ताह होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1: क्या इस सप्ताह बाजार में तेजी लौट सकती है?
A1: बाजार के rangebound रहने की उम्मीद है। जीएसटी काउंसिल से सकारात्मक नतीजे और US डेटा के अनुकूल रहने पर तेजी की एक रैली देखने को मिल सकती है। हालाँकि, FII selling और global cues पर निर्भर करेगा।
Q2: FIIs की selling क्यों जारी है?
A2: US के टैरिफ निर्णय, भारतीय बाजारों में high valuations और global uncertainty के चलते FIIs लगातार selling कर रहे हैं। जब तक India-US trade tensions कम नहीं होते, यह दबाव जारी रह सकता है।
Q3: ऑटो स्टॉक्स में निवेश करना सही रहेगा?
A3: त्योहारी सीजन और बेहतर मानसून से ऑटो सेल्स में सुधार की उम्मीद है। अगर अगस्त की sales numbers मजबूत आती हैं तो ऑटो स्टॉक्स में small rally देखने को मिल सकती है। हालाँकि, high valuation के चलते stock-picking जरूरी है।
Q4: रुपये की कमजोरी का बाजार पर क्या असर होगा?
A4: रुपय की कमजोरी FIIs के लिए returns को कम करती है, जिससे उनकी selling और बढ़ सकती है। हालाँकि, IT और फार्मा जैसे export-oriented sectors को इससे फायदा होता है।
निष्कर्ष
1 से 5 सितंबर का सप्ताह डालाल स्ट्रीट के लिए कई महत्वपूर्ण घटनाओं और आंकड़ों से भरा हुआ है। घरेलू मोर्चे पर जीएसटी काउंसिल के फैसले और ऑटो सेल्स के आंकड़े बाजार की दिशा तय करेंगे, तो वहीं वैश्विक स्तर पर अमेरिकी नौकरी के आंकड़े फेड की अगली चाल का संकेत देंगे। ऐसे में, निवेशकों को सलाह है कि वे volatile conditions में disciplined रहें और केवल fundamental रूप से मजबूत स्टॉक्स में ही long-term perspective के साथ निवेश करें। बाजार के उतार-चढ़ाव से घबराएं नहीं, बल्कि अच्छे अवसरों की तलाश में रहें।
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