18 सितंबर, 2025 – भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने अडानी समूह के खिलाफ हिंडनबर्ग रिसर्च के सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। सेबी के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश वार्ष्णेय ने दो अलग-अलग आदेशों में कहा कि संबंधित पक्ष लेनदेन में हेराफेरी और जानबूझकर छिपाने के आरोपों का कोई सबूत नहीं मिला है।
मामले की पृष्ठभूमि
जनवरी 2023 में अमेरिकी शॉर्ट-सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च ने अडानी समूह पर आरोप लगाए थे कि समूह ने शेल कंपनियों का उपयोग करके फंड का गलत तरीके से इस्तेमाल किया और निवेशकों को गुमराह किया। इस रिपोर्ट के बाद अडानी समूह की बाजार पूंजीकरण में 150 अरब डॉलर की गिरावट आई थी।
सेबी की जांच के निष्कर्ष
सेबी ने वित्तीय वर्ष 2018-19 से 2022-23 तक की अवधि की जांच की। नियामक ने पाया कि:
- सभी ऋण ब्याज सहित चुकाए गए थे
- उस समय संबंधित पक्ष लेनदेन की परिभाषा में ये लेनदेन नहीं आते थे
- जानबूझकर धोखाधड़ी का कोई सबूत नहीं मिला
- गौतम अडानी, राजेश अडानी और सीएफओ जुगेशिंदर सिंह के खिलाफ आरोप साबित नहीं हुए
बाजार पर प्रभाव
इस फैसले के बाद 18 सितंबर को अडानी समूह की कंपनियों के शेयरों में 5% की बढ़त देखी गई। समूह का बाजार पूंजीकरण 140 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। विश्लेषकों का मानना है कि इससे समूह को 5 अरब डॉलर के नए निवेश का रास्ता साफ होगा।
निवेशकों के लिए महत्व
यह फैसला भारतीय कॉर्पोरेट प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है। इससे निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा और बाजार में स्थिरता आएगी। हालांकि, कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर निगरानी जारी रहेगी।
आगे की राह
अडानी समूह नवीकरणीय ऊर्जा और बंदरगाह परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित करना जारी रखेगा। समूह के पास 16 अरब डॉलर के वैश्विक निवेश प्रतिबद्धताएं हैं और यह फैसला इन परियोजनाओं को गति देगा।
यह फैसला भारतीय पूंजी बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण विकास है और यह दर्शाता है कि भारत का नियामक ढांचा मजबूत और निष्पक्ष है।