जब आप शेयर खरीदते या बेचते हैं, तो यह प्रक्रिया कई चरणों से गुजरती है जिससे शेयर और पैसा सही तरीके से ट्रांसफर हो सके। इसे क्लीयरिंग और सेटलमेंट कहते हैं, और हर निवेशक के लिए इसे समझना जरूरी है।
इस ब्लॉग में हम जानेंगे:
✔ शेयर खरीदने पर क्या होता है?
✔ शेयर बेचने पर क्या होता है?
✔ T+1 सेटलमेंट क्या है?
✔ ईयरमार्किंग क्या है?
चलिए शुरू करते हैं!
10.1 – मार्केट स्ट्रक्चर: क्लीयरिंग और सेटलमेंट
क्लीयरिंग और सेटलमेंट वह प्रक्रिया है जो सुनिश्चित करती है कि:
-
जब आप शेयर खरीदते हैं, तो वह आपके डीमैट अकाउंट में आ जाए।
-
जब आप शेयर बेचते हैं, तो पैसा आपके ट्रेडिंग अकाउंट में आ जाए।
यह जानना क्यों जरूरी है?
-
आपको पता चलता है कि शेयर/पैसा कब तक अकाउंट में आएगा।
-
ट्रेड से जुड़ी कन्फ्यूजन कम होती है।
-
लेन-देन पारदर्शी तरीके से होता है।
10.2 – शेयर खरीदने पर क्या होता है?
दिन 1 – ट्रेड डे (T डे) – सोमवार
-
आप रिलायंस के 100 शेयर ₹1,000 प्रति शेयर पर खरीदते हैं (कुल: ₹1,00,000)।
-
ब्रोकर चेक करता है कि आपके पास पर्याप्त पैसा है (₹1,00,000 + चार्जेस)।
-
लागू शुल्क:
-
ब्रोकरेज: ₹0 (डिलीवरी ट्रेड के लिए)।
-
STT (सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स): 0.1% (₹100)।
-
एक्सचेंज चार्ज: 0.00345% (₹3.45)।
-
GST: ब्रोकरेज + ट्रांजैक्शन चार्ज पर 18% (₹0.62)।
-
SEBI चार्ज: ₹0.12।
-
स्टाम्प ड्यूटी: 0.015% (₹15)।
-
कुल शुल्क: ₹119.19।
-
-
कॉन्ट्रैक्ट नोट जनरेट होता है और आपके ईमेल पर आता है (ट्रेड डिटेल्स)।
-
पैसा ब्लॉक हो जाता है, लेकिन शेयर अभी डीमैट में नहीं आते।
दिन 2 – T+1 डे (मंगलवार) – सेटलमेंट
-
भारत में T+1 सेटलमेंट लागू है (जनवरी 2023 से)।
-
शेयर T+1 दिन के अंत तक आपके डीमैट अकाउंट में आ जाते हैं।
-
पहले T+2 सेटलमेंट था (शेयर बुधवार तक आते थे)।
10.3 – शेयर बेचने पर क्या होता है?
दिन 1 – ट्रेड डे (T डे) – सोमवार
-
आप रिलायंस के 100 शेयर ₹1,050 प्रति शेयर पर बेचते हैं (कुल: ₹1,05,000)।
-
शेयर आपके डीमैट अकाउंट से ब्लॉक हो जाते हैं।
-
80% पैसा (₹84,000) तुरंत ट्रेडिंग अकाउंट में आ जाता है।
-
बाकी 20% (₹21,000) T+1 दिन में आता है।
दिन 2 – T+1 डे (मंगलवार) – सेटलमेंट
-
शेयर आपके डीमैट अकाउंट से डेबिट हो जाते हैं।
-
पूरा पैसा (चार्जेस कटने के बाद) अकाउंट में आ जाता है।
10.4 – ईयरमार्किंग क्या है?
पहले, जब आप शेयर बेचते थे:
-
ब्रोकर शेयर डेबिट करके अपने पूल अकाउंट में रखता था (T+2 तक)।
-
इससे ब्रोकर द्वारा गलत इस्तेमाल का खतरा था।
नई ईयरमार्किंग प्रणाली (नवंबर 2022 से)
-
शेयर डेबिट नहीं होते, बल्कि “ईयरमार्क” (अस्थायी रूप से लॉक) हो जाते हैं।
-
T+1 पर शेयर सीधे क्लीयरिंग कॉर्पोरेशन को ट्रांसफर होते हैं।
-
ब्रोकर का दखल नहीं – गलत इस्तेमाल का खतरा कम।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. क्या T डे पर खरीदे शेयर T+1 पर बेच सकते हैं?
हां, लेकिन BTST (Before T+1 Selling) के लिए एलिजिबल होना चाहिए।
Q2. अगर खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं तो क्या होगा?
ब्रोकर ऑर्डर रिजेक्ट कर देगा।
Q3. T+1 सेटलमेंट T+2 से बेहतर क्यों है?
सेटलमेंट जल्दी होता है, रिस्क कम होता है।
Q4. अगर शेयर बेच दिए लेकिन डिलीवर नहीं किए तो?
ब्रोकर ऑक्शन कर सकता है, और आप पर जुर्माना लग सकता है।