भूमिका
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का माहौल गर्म है। कुल 243 सीटों पर होने वाले इस चुनाव में इस बार समीकरण काफी दिलचस्प हैं। मैदान में है NDA, महागठबंधन और अब एक नया खिलाड़ी — प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी (JSP)।
लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि पार्टी ने सभी सीटों पर उम्मीदवार उतार दिए, लेकिन खुद प्रशांत किशोर ने चुनाव न लड़ने का फैसला किया। इसी फैसले को लेकर नया सर्वे सामने आया है — और यह बताता है कि इस कदम का सीधा फायदा NDA को मिल सकता है।
कौन हैं प्रशांत किशोर और क्या है जन सुराज पार्टी?
चुनावी रणनीतिकार से नेता तक का सफर
प्रशांत किशोर (PK) का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं। कांग्रेस, BJP, TMC, AAP जैसी कई पार्टियों की चुनावी रणनीति बनाने के बाद उन्होंने राजनीति में सीधा प्रवेश किया और अपनी खुद की पार्टी बना डाली।
जन सुराज पार्टी की पॉलिटिक्स
2024 के अंत में लॉन्च हुई JSP खुद को “बदलाव की राजनीति” का चेहरा बताती है। मुद्दे हैं — सुशासन, विकास, रोज़गार, और बिहार को “माइग्रेशन स्टेट” से “मैन्युफैक्चरिंग स्टेट” बनाने का विज़न।
लेकिन PK खुद चुनाव क्यों नहीं लड़ रहे?
उनका कहना है कि वे अभी संगठन खड़ा कर रहे हैं, इसलिए उनका रोल नेतृत्व और रणनीति का है, न कि किसी एक सीट पर प्रत्याशी बनने का। लेकिन जनता इसका अलग मतलब निकाल रही है — और सर्वे में इसी ने बड़ा इफेक्ट दिखाया है।
नया सर्वे क्या कहता है?
एक हालिया सर्वे के मुताबिक:
| सवाल | लोगों की राय |
|---|---|
| PK के चुनाव न लड़ने से किसे फायदा? | 46% बोले – NDA को फायदा होगा |
| किसे नुकसान? | 36% बोले – महागठबंधन को नुकसान |
| असर नहीं पड़ेगा | 18% बोले – कोई फर्क नहीं |
सीटों का अनुमान (सर्वे आधारित)
| गठबंधन/पार्टी | अनुमानित सीटें |
|---|---|
| NDA | 120 – 140 सीटें |
| BJP | 70 – 81 |
| JDU | 42 – 48 |
| LJP | 5 – 7 |
| महागठबंधन | 93 – 112 सीटें |
| RJD | 69 – 78 |
| कांग्रेस | 9 – 17 |
| CPI(ML) | 12 – 14 |
| जन सुराज पार्टी | 1 सीट (243 में से) |
साफ है — जनता को लगता है कि PK के मैदान से बाहर रहने का सीधा फायदा सत्तारूढ़ NDA को मिल रहा है।
PK के चुनाव न लड़ने से NDA को फायदा क्यों?
1. वोट बंटने का असर
JSP नई पार्टी है, लेकिन वह एंटी-NDA वोटों का हिस्सा अपने तरफ खींच लेगी। इससे फायदा विरोधी को नहीं, बल्कि NDA को मिलेगा।
2. “तीसरा मोर्चा” गेम खराब करता है
अगर PK खुद चुनाव लड़ते, तो उन्हें “मुख्यमंत्री फेस” या “सीधे मुकाबले” वाली इमेज मिलती। अब वह इफ़ेक्ट कम हो गया — यानी मुकाबला फिर वही पुराना: NDA vs महागठबंधन।
3. संगठन बनाम चेहरा
NDA के पास 20-25 साल पुराना संगठन है। JSP नई पार्टी है। PK का खुद चुनाव न लड़ना JSP को कम गंभीर खिलाड़ी जैसा दिखाता है — जिससे NDA को नैरेटिव फायदा।
महागठबंधन की मुश्किलें
- RJD-कांग्रेस को अब सिर्फ NDA नहीं, JSP से भी वोट कटने का डर है।
- युवाओं, बेरोज़गारों और “बदलाव वाले वोटरों” में PK की अपील है — यही वोट पहले RJD-कांग्रेस को जाते थे।
- अगर JSP ने सिर्फ 3–5% वोट भी काट लिए, तो दर्जनों सीटों पर महागठबंधन की हार तय है।
PK का हमला: नीतीश और लालू “बिहार की बरबादी की जड़”
प्रशांत किशोर लगातार नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव पर हमला बोल रहे हैं:
“अगर बिहार वाले फिर से लालू-नीतीश को ही वोट देंगे तो उन्हें फिर जानवरों की तरह ट्रेन में लटककर बाहर जाना पड़ेगा।”
“बिहार में जो भी समस्या है — बेरोज़गारी, पलायन, फ़ैक्टरी न होना — सबकी जड़ यही दो लोग हैं।”
उनका दावा:
👉 NDA बनाम JSP है
👉 महागठबंधन तीसरे नंबर पर है
👉 JSP 150+ सीटें जीत सकती है (अगर लोग “विश्वास की छलांग” लगाएँ)
2025 चुनाव: आगे क्या हो सकता है?
✅ NDA फायदे में दिख रहा है
✅ JSP वोट काटेगी, सीट नहीं जीतेगी (फिलहाल)
✅ महागठबंधन की राह मुश्किल
✅ PK की इमेज — सीधे लड़ाके से ज़्यादा रणनीतिकार
लेकिन… बिहार पॉलिटिक्स में कास्ट, उम्मीदवार, लोकल इश्यू, आखिरी हफ्ते की लहर – सब चुनाव बदल सकते हैं।
निष्कर्ष
प्रशांत किशोर का चुनाव न लड़ना एक शातिर रणनीतिक फैसला हो सकता है — या एक जोखिम भरी गलती।
सर्वे के अनुसार फिलहाल यह फैसला NDA को सीधा बढ़त देता दिख रहा है।
JSP इस चुनाव में सरकार नहीं बना पाएगी, लेकिन वोट-कटवा नहीं रहना चाहती — वो लंबी रेस की पॉलिटिक्स खेल रही है।
बिहार का असली चुनावी नज़ारा नवंबर के पहले और आखिरी हफ्ते में तय होगा —
क्योंकि बिहार में चुनाव नतीजे सर्वे से नहीं, जनता की चुप्पी से निकलते हैं।