व्यापार संकट में आशा की किरण
3 सितंबर 2025 को, वैश्विक व्यापार में बढ़ते टैरिफ के कारण उथल-पुथल के बीच, वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारतीय निर्यातकों के लिए मजबूत समर्थन का वादा किया। निर्यात संवर्धन परिषदों (EPCs) और उद्योग नेताओं की सभा को संबोधित करते हुए, गोयल ने अगस्त से लागू 50% अमेरिकी टैरिफ का मुकाबला करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। वैश्विक व्यापार की तेजी से बदलती गतिशीलता के बीच, उनके आश्वासनों ने सक्रिय रणनीतियों के साथ आशावाद का संदेश दिया।
भारत के निर्यात की रीढ़ को मजबूत करना
गोयल का संदेश स्पष्ट था: सरकार निर्यातकों के लिए सहायक माहौल तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने निर्यातकों से उत्पाद की गुणवत्ता बढ़ाने, अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करने, आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाने, और नए बाजारों की तलाश करने का आग्रह किया। यह तब हुआ जब जुलाई में भारत का निर्यात 7.29% बढ़कर 37.24 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया, जिसमें अमेरिका को निर्यात में 19.94% की उछाल के साथ 8.01 बिलियन डॉलर दर्ज किए गए। वाणिज्य मंत्रालय द्वारा आयोजित इस बैठक में टैरिफ से उत्पन्न चुनौतियों का समाधान करने और क्षेत्र-विशिष्ट समाधानों पर जोर दिया गया।

टैरिफ का मुकाबला करने की रणनीतिक पहल
टैरिफ के प्रभाव को कम करने के लिए, गोयल ने तत्काल कदमों की रूपरेखा प्रस्तुत की: नकदी प्रवाह में सुधार, दिवालियापन रोकना, विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) इकाइयों को लचीलापन देना, और आयात प्रतिस्थापन को बढ़ावा देना। सरकार का निर्यात संवर्धन मिशन, जिसके लिए 2,250 करोड़ रुपये का बजट है, इस प्रयास का आधार है। हालांकि, निर्यातकों ने वित्तीय प्रोत्साहन और ब्याज सब्सिडी योजनाओं को पुनर्जनन की मांग की, लेकिन सब्सिडी समर्थन की संभावना कम है।
उदाहरण: 50% अमेरिकी टैरिफ लागत वृद्धि का सामना कर रहे एक कपड़ा निर्यातक दक्षिण-पूर्व एशिया की ओर रुख कर सकता है, SEZ लचीलापन का उपयोग करके परिचालन लागत कम कर सकता है।
तालिका: प्रमुख निर्यात समर्थन उपाय
| उपाय | फोकस क्षेत्र |
|---|---|
| नकदी प्रवाह समर्थन | छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए नकदी |
| SEZ लचीलापन | परिचालन में आसानी |
| आयात प्रतिस्थापन | स्थानीय स्रोत |
| बाजार विविधीकरण | नए व्यापार मार्ग |
व्यापार लचीलापन की झलक
जुलाई में 27.35 बिलियन डॉलर और अप्रैल-जुलाई 2025-26 में 94.81 बिलियन डॉलर के व्यापार घाटे के बावजूद, भारत का निर्यात लचीलापन चमक रहा है। अमेरिका, जो 2024-25 में 20% निर्यात का हिस्सा है, एक प्रमुख बाजार बना हुआ है, जिसमें अप्रैल-जुलाई में अमेरिका को निर्यात 21.64% बढ़कर 33.53 बिलियन डॉलर हो गया। गोयल का गुणवत्ता उन्नयन और विविधीकरण का आह्वान इस गति को बनाए रखने का लक्ष्य रखता है।
भविष्य की राह
गोयल के आश्वासनों का आधार कार्यान्वयन है—नीतियों को सुव्यवस्थित करना और निर्यातकों का तेजी से अनुकूलन सुनिश्चित करना। निर्यात संवर्धन मिशन की सफलता कपड़ा और आभूषण जैसे क्षेत्रों को मजबूत कर सकती है, जबकि नए बाजारों की खोज अमेरिकी नुकसान की भरपाई कर सकती है। हालांकि, इन प्रयासों को घरेलू दबावों के साथ संतुलित करना महत्वपूर्ण होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (एफएक्यू)
- गोयल निर्यातकों का समर्थन क्यों कर रहे हैं?
अमेरिकी टैरिफ और वैश्विक व्यापार बदलावों का मुकाबला करने के लिए। - उन्होंने क्या बदलाव सुझाए?
गुणवत्ता बढ़ाना, बाजारों में विविधता, और मानकों का पालन। - क्या सब्सिडी वापस आएगी?
संभावना कम है, लेकिन नकदी और SEZ समर्थन उपलब्ध है। - भारत का निर्यात कैसा प्रदर्शन कर रहा है?
जुलाई में 7.29% वृद्धि, अमेरिका में मजबूत प्रदर्शन। - निर्यात मिशन की भूमिका क्या है?
2,250 करोड़ रुपये की योजना निर्यात लचीलापन बढ़ाने के लिए।
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