🔴 दिल्ली फिर घुटन में, AQI 300 पार
कुछ दिनों की हल्की राहत के बाद, दिल्ली की हवा फिर ख़तरनाक स्तर पर पहुँच गई है। गुरुवार शाम तक दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 311 दर्ज किया गया, जो कि ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। एक दिन पहले AQI 202 (खराब श्रेणी) था, लेकिन प्रदूषकों में अचानक वृद्धि ने स्थिति और बिगाड़ दी।
PM2.5 अब भी प्रमुख प्रदूषक है, जो बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए गंभीर खतरा है।
📉 दिल्ली बनाम एनसीआर – वायु गुणवत्ता तुलना
| शहर | AQI स्तर | श्रेणी |
|---|---|---|
| दिल्ली | 311 | बहुत खराब |
| गुरुग्राम | 269 | खराब |
| नोएडा | 257 | खराब |
| ग्रेटर नोएडा | 228 | खराब |
| गाज़ियाबाद | 266 | खराब |
| फ़रीदाबाद | 218 | खराब |
AQI.in के अनुसार, आज दिल्ली की हवा में सांस लेना ऐसा है जैसे 9.2 सिगरेट पीने के बराबर, जबकि गुरुग्राम में यह लगभग 9.8 सिगरेट के बराबर है।
🌫️ प्रदूषण बढ़ने के प्रमुख कारण
✅ हवा की गति में कमी
✅ PM2.5 में वृद्धि (वाहन, उद्योग, धूल)
✅ पंजाब-हरियाणा में पराली जलना
✅ ठंडी हवा व ‘विंटर इन्वर्ज़न’
✅ निर्माण धूल, पटाखे, बायोमास जलाना
मौसम विभाग के अनुसार दोपहर तक हवा की रफ्तार 15 kmph तक बढ़ सकती है, लेकिन रात होते-होते फिर 10 kmph से कम हो जाएगी, जिससे प्रदूषण सतह पर ही फँसा रह जाएगा।
⏳ 6 दिन तक राहत नहीं – पूर्वानुमान
केंद्र की वायु निगरानी एजेंसियों का कहना है कि अगले 5–6 दिनों तक दिल्ली की हवा “बहुत खराब” श्रेणी में ही रहेगी।
यदि मौसम और बिगड़ा तो कुछ क्षेत्रों में AQI ‘गंभीर’ (401–500) तक पहुँच सकता है।
🫁 ‘बहुत खराब’ AQI का स्वास्थ्य पर प्रभाव
AQI 301–400 का मतलब है:
- दमा (अस्थमा) के मरीजों को तुरंत दिक्कत
- आंखों और गले में जलन
- लगातार खांसी व सांस फूलना
- फेफड़ों की कार्यक्षमता कम होना
- दिल के मरीजों के लिए खतरा
- बच्चों में इंफेक्शन का जोखिम बढ़ना
लंबे समय तक PM2.5 के संपर्क में रहने से क्रॉनिक फेफड़े की बीमारी, हृदय रोग और प्रतिरोधक क्षमता में कमी हो सकती है।
🛑 सरकार द्वारा संभावित कदम (GRAP के तहत)
- डीज़ल जेनरेटर पर रोक
- प्रदूषणकारी उद्योग व स्टोन क्रशर बंद
- निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध
- ‘ऑड-ईवन’ लागू होने की संभावना
- स्कूलों की अस्थायी छुट्टियाँ
- खुले में कचरा जलाने पर जुर्माना बढ़ेगा
✅ नागरिक क्या करें? (सुरक्षा उपाय)
✔ बाहर निकलते समय N95/N99 मास्क पहनें
✔ घरों में एयर प्यूरिफायर का उपयोग करें
✔ सुबह-शाम खुले में व्यायाम न करें
✔ तुलसी, अदरक, गुड़, सिट्रस फल जैसे फेफड़े शुद्ध करने वाले आहार लें
✔ घर में एलोवेरा, स्नेक प्लांट जैसे पौधे लगाएँ
✔ पर्याप्त पानी पिएँ
✔ बाहर जाने से पहले AQI ऐप चेक करें
❓ आम सवाल (FAQs)
Q1. ‘बहुत खराब’ AQI का मतलब क्या है?
इसका मतलब है कि हवा में प्रदूषण इतना अधिक है कि लंबे समय तक सांस लेने से बीमारी हो सकती है।
Q2. PM2.5 क्या है और यह खतरनाक क्यों है?
यह बेहद महीन कण होते हैं जो फेफड़ों और खून में घुस जाते हैं, जिससे दिल और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियाँ होती हैं।
Q3. क्या दिल्ली में प्रदूषण सिर्फ सर्दियों में होता है?
नहीं। सर्दियों में यह ज्यादा दिखता है क्योंकि हवा धीमी हो जाती है, पर प्रदूषण साल भर रहता है।
Q4. क्या एयर प्यूरिफायर वाकई असरदार है?
हाँ, खासकर घर के अंदर, बुजुर्गों और दमा मरीजों के लिए लाभकारी है।
📝 निष्कर्ष
दिल्ली का बढ़ता वायु प्रदूषण अब सिर्फ मौसमी समस्या नहीं रहा, बल्कि यह एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल बन चुका है।
जब तक सरकार और आम लोग मिलकर दीर्घकालिक समाधान नहीं अपनाते, स्मॉग तो जाएगा, लेकिन उसके असर फेफड़ों पर हमेशा रह जाएंगे।