बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के गरमाते माहौल में आरजेडी नेता और महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के दावेदार तेजस्वी यादव रोजगार को सबसे बड़ा गेम-चेंजर बता रहे हैं। 27 अक्टूबर 2025 को इंडियन एक्सप्रेस के साथ एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में यादव ने ‘हर परिवार को एक सरकारी नौकरी’ के वादे पर उठ रहे सवालों को ‘लागत नहीं, निवेश’ बताया। एनडीए की योजनाओं पर ‘राजनीतिक हेराफेरी’ का आरोप लगाते हुए उन्होंने प्रशांत किशोर को ‘मास लीडर नहीं, मीडिया क्रिएशन’ करार दिया। पलायन और शासन की आलोचनाओं के बीच यादव खुद को युवाओं का चैंपियन और नीतीश सरकार को ‘रिमोट कंट्रोल्ड’ सरकार बता रहे हैं।

अगर आप बिहार चुनाव 2025 या तेजस्वी यादव नौकरी वादा का विश्लेषण कर रहे हैं, तो यहां समझें इंटरव्यू के मुख्य मुद्दे।
बिहार की जीवनरेखा: 10 लाख से हर परिवार तक – वादा या वोट-बैट?
2020 के 10 लाख नौकरियों के वादे ने नीतीश सरकार को हिला दिया था। अब यादव ने हर परिवार को सरकारी नौकरी का वादा किया है। विपक्ष राज्य के ₹3.5 लाख करोड़ कर्ज का हवाला दे रहा है, लेकिन यादव का जवाब साफ है।
“हम नौकरी को लागत नहीं, निवेश मानते हैं,” उन्होंने कहा। स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे में ‘मल्टीप्लायर इफेक्ट’ की बात करते हुए कहा कि विशेषज्ञ इसे लागू करने का रोडमैप बना रहे हैं। 2022-24 में उपमुख्यमंत्री रहते 5 लाख नौकरियां दी गईं, जो इस वादे की संभावना दिखाती हैं। उन्होंने पलायन के मूल कारण – युवाओं का बेंगलुरु-दिल्ली जाना – पर जोर दिया।
एनडीए इसे अव्यवहारिक बता रही है, लेकिन यादव का कहना है कि कर्मचारियों को ‘खर्च’ मानना विकास रोकता है। यह वादा उस राज्यव्यापी पीड़ा को संबोधित करता है जहाँ हर साल 20 लाख से अधिक बिहारी पलायन करते हैं (NSSO 2024)।
| वादा | 2020 | 2025 | संभावित प्रभाव |
|---|---|---|---|
| पैमाना | 10 लाख नौकरियां | हर परिवार को 1 नौकरी (~1.25 करोड़ परिवार) | पलायन में कमी, सामाजिक क्षेत्र में विकास |
| फोकस | सामान्य रोजगार | स्वास्थ्य, शिक्षा, उपयोगिताएं | मल्टीप्लायर इफेक्ट: बेहतर स्कूल, अस्पताल, बिजली |
| व्यवहार्यता | 5 लाख नौकरियां (2022-24) | विशेषज्ञों द्वारा समर्थित | एनडीए की ‘रेवड़ी’ आलोचना का जवाब |
बिहार युवा बेरोजगारी 2025 पर नजर रखने वालों के लिए यादव का सूत्र: नौकरी भीख नहीं, विकास का इंजन है।
राहत बनाम सम्मान: एनडीए की ₹10,000 योजना पर ‘हेराफेरी’ का आरोप
बिहार की राहत योजनाओं पर एनडीए की 1 करोड़ महिलाओं को ₹10,000 सालाना के प्रस्ताव पर यादव ने अपनी माई बहन मान योजना (₹2,500 मासिक) को ‘बेहतर और टिकाऊ’ बताया। “यह मानवीय सम्मान और तात्कालिक जरूरत का सवाल है,” उन्होंने कहा।
बुनियादी ढांचा विकसित होने तक राहत जरूरी है। एनडीए की चुनावी घोषणा? “साढ़े चार साल कुछ नहीं किया, अब वोटरों को लुभाने को खजाना खोल रहे हैं।” यादव का विजन: राहत और सुधार साथ-साथ, चुनावी रिश्वत नहीं।
यह टकराव बिहार फ्रीबी राजनीति 2025 को दर्शाता है: एनडीए की एकमुश्त राशि बनाम आरजेडी की निरंतर सशक्तिकरण योजना।
गठबंधन एकता: 11 सीटों पर ‘फ्रेंडली फाइट’
महागठबंधन के सीएम फेस के रूप में यादव ने 11 सीटों पर सीट-शेयरिंग विवाद को स्वीकारा। “बिहार जटिल है,” उन्होंने कहा, स्थानीय गतिशीलता के कारण विकल्प जरूरी हैं। लेकिन एकता कायम है: “हम एक-दूसरे से नहीं, असली विरोधी से लड़ रहे हैं।”
कांग्रेस को पसंदीदा सीटें मिलीं, वीआईपी के मुकेश साहनी डिप्टी सीएम की मांग कर रहे हैं। सब मजबूत मोलभाव? “हर कोई जीतना चाहता है – यही चुनावी राजनीति है।” नौकरियों, न्याय और ‘खटारा एनडीए’ को हटाने पर सहमति सबसे महत्वपूर्ण है।
पारिवारिक विवाद – भाई तेज प्रताप का आरजेडी उम्मीदवार के खिलाफ चुनाव – पर यादव ने लोकतांत्रिक रुख अपनाया: “हर किसी को समर्थन मांगने की आजादी है।”
महागठबंधन सीट शेयरिंग 2025 में यादव का मंत्र: विविधता में एकता, आक्रामकता बाहरी।
प्रशांत किशोर पर वार: ‘मास लीडर नहीं, मीडिया क्रिएशन’
यादव का सबसे तीखा हमला जन सुराज संस्थापक पर। “उनके बारे में क्या कहना? वह मास लीडर नहीं, मीडिया क्रिएशन हैं,” यादव ने कहा। एक पृष्ठभूमि सलाहकार होने के नाते किशोर की कोई ‘जिम्मेदारी और ट्रैक रिकॉर्ड’ नहीं है। बिहार का विवेकी मतदाता बातें करने और करने वालों में फर्क जानता है।
यादव की शिक्षा (क्रिकेट के लिए पढ़ाई छोड़ी) या लालू प्रसाद की वंशवाद महत्वाकांक्षा पर टिप्पणियों पर: “डिग्री मायने रखती है, लेकिन ज्ञान उससे नहीं आता।” यादव ने अपनी ‘प्रोग्रेसिव पॉलिटिक्स’ सीख और वंचितों के लिए लालू के सामाजिक क्रांति का हवाला दिया।
किशोर के युवाओं में दिलचस्पी न दिखाने पर: “मेरा ट्रैक रिकॉर्ड सबके सामने है।” यह विवाद प्रशांत किशोर बनाम तेजस्वी यादव 2025 की लड़ाई को तेज कर रहा है।
विच-हंट और नीतीश की 20 साल की विफलता: ‘दिल्ली से रिमोट कंट्रोल’
यादव और परिवार पर आईआरसीटीसी मामले के आरोप? “लगातार विच-हंट,” राजनीति विफल होने पर केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग। “लोग समझते हैं,” उन्होंने कहा, चुनावी समय में मामले उठाने पर न्यायपालिका पर भरोसा जताया।
नीतीश के दो दशक के शासन पर: “परिणाम बोलने चाहिए।” वादा किया ‘डबल-इंजन’ परिवर्तन विफल रहा; मोदी का 2020 पैकेज गायब हो गया। “शासन ढह गया – सीएम नियंत्रण में नहीं, दिल्ली दरबार से रिमोट चल रहा है।”
नीतीश कुमार शासन आलोचना पर यादव का फैसला: शर्मनाक, विकास के बजाय विचलन।
बिहार का चौराहा: 2025 चुनाव में नौकरी या राहत?
तेजस्वी यादव का इंटरव्यू महागठबंधन की रणनीति स्पष्ट करता है: नौकरी भविष्य, राहत सम्मान, गठबंधन हथियार। किशोर और एनडीए को विचलन बताते हुए यादव उस बिहार की कल्पना कर रहे हैं जहाँ युवा घर पर निर्माण करें, विदेश न जाएं। चुनाव नजदीक आते यह नौकरी-केंद्रित नैरेटिव 2020 की तरह जोरदार प्रभाव दिखा सकती है – अगर वित्तीय संशयवादियों को चुप करा सके।
क्या यादव का विजन नीतीश को हटा पाएगा, या राहत योजनाएं बांटेगी? कमेंट में अपनी राय दें। बिहार विधानसभा चुनाव 2025, तेजस्वी यादव आरजेडी रणनीति पर अपडेट के लिए सब्सक्राइब करें। बिहार की शतरंज में नौकरी चेकमेट साबित हो सकती है।