आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक शुरू, ब्याज दरों पर बड़े फैसले की उम्मीद

29 सितंबर, 2025 – भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक सोमवार को शुरू हो गई है। यह वित्तीय वर्ष 2026 की चौथी द्विसमासिक बैठक है, जिसके नतीजे 1 अक्टूबर को सुबह 10 बजे घोषित किए जाएंगे।

बैठक का कार्यक्रम

बैठक 29 सितंबर से शुरू होकर 1 अक्टूबर तक चलेगी। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा 1 अक्टूबर को सुबह 10 बजे नीति निर्णय की घोषणा करेंगे, जिसके बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी।

लाइव कवरेज के स्रोत

जनता और हितधारक निम्नलिखित माध्यमों से बैठक के नतीजों को लाइव देख सकते हैं:

  • आरबीआई का यूट्यूब चैनल
  • आरबीआई की आधिकारिक वेबसाइट
  • वित्त मंत्रालय और PIB की वेबसाइटें
  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आरबीआई के अधिकारिक हैंडल

पिछली बैठकों के नतीजे

अगस्त 2025 की बैठक में MPC ने रेपो रेट 5.50% पर बरकरार रखा था और नीतिगत रुख को तटस्थ बनाए रखा था। इससे पहले जून 2025 की बैठक में 50 आधार अंकों की ब्याज दर कटौती की गई थी, जिसमें रेपो रेट 6.00% से घटाकर 5.50% कर दिया गया था।

अक्टूबर बैठक में प्रमुख विचारणीय मुद्दे

विशेषज्ञों के अनुसार, MPC इस बैठक में निम्नलिखित कारकों पर विचार करेगी:

  • मुद्रास्फीति का वर्तमान स्तर (वर्तमान में 3.2%)
  • 6.5% की जीडीपी विकास दर का लक्ष्य
  • वैश्विक आर्थिक स्थितियां
  • घरेलू मांग और आपूर्ति की स्थिति
  • अमेरिकी फेड की मौद्रिक नीति

बाजार की उम्मीदें

अधिकांश अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि MPC ब्याज दरों में कोई बदलाव किए बिना वर्तमान स्तर पर बनाए रख सकती है। हालांकि, कुछ विश्लेषक 25 आधार अंकों की कटौती की संभावना जता रहे हैं।

हालिया आर्थिक संकेतक

हाल के आंकड़े मौद्रिक नीति के लिए अनुकूल स्थिति दर्शाते हैं:

  • मुद्रास्फीति RBI के लक्ष्य क्षेत्र में
  • आर्थिक विकास दर मजबूत बनी हुई
  • विदेशी मुद्रा भंडार स्थिर
  • औद्योगिक उत्पादन में सुधार

निवेशकों के लिए महत्व

यह बैठक विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके नतीजे ऋण लागत, निवेश निर्णयों और आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करेंगे। बैंकिंग, रियल एस्टेट और ऑटोमोबाइल जैसे ब्याज दर-संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष रुचि है।

आरबीआई का निर्णय भारतीय अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, खासकर वैश्विक अनिश्चितताओं और घरेलू विकास चुनौतियों के मौजूदा दौर में।

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